आज का विचार

"घर का भेदी लंका ढहाए"

ये कहावत सतयुग से चली आ रही कल रात फिर चरित्रार्थ हुई

गर आनंदपाल का भाई पकड़ा न जाता तो पुलिस आज भी अंधेरे में तीर मार रही होती

खेर अब विषय पर आते है

आनंदपाल सिंह राजपूत था या रावणा राजपूत doesn't matter मेरे लिये ये मुख्य प्रश्न नही हो सकता
जो जातीय वर्चस्व की लड़ाईया लड़ रहे उनके लिए ये सब जरूरी है

मेरे लिए तो  अहम वो व्यक्ति है  जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाये ओर आवाज भी उन्ही की भाषा मे उठाये क्योंकि अहिंसावाद अब सिर्फ किताब भर में रह गया है आप तब तक कुचलते जाते रहोगे जब तक आप अगले को कुचलने का माद्दा न पाल लो

नही तो क्या जरूरत थी एक LLB ग्रेज्युएट को बन्दूक उठाने की

अब चलिए थोड़ा विस्तार से जान लेते है आनंदपाल सिंह के बारे में

बात मिलेनियम वर्ष शुरू होने से ठीक पहले की है
मिलेनियम जिसे हम वर्ष 2K के नाम से भी लिखते थे

लाडनू के सेवराद गांव के LLB पास आउट आनंदपाल सिंह ने पंचायत समिति चुनाव में भाग लेने की ठानी वो भी कद्दावर नेता और तत्कालीन मंत्री हरजीराम बुरडक के भतीजे के सामने

मुकाबला कठिन था पहले नतीजे में आनन्दपाल को 10 वोट से जिताया गया लेकिन फिर से रिकाउंटिंग हुई और इस बार उसे 1 वोट से हार का सामना करना पड़ा आनंदपाल ने इसे अपने खिलाफ साजिश बताया और साजिश की जड़ मंत्री हरजीराम बुरडक

ठीक उन दिनों डीडवाना में  हरजी बुरडक के लेफ्ट hand जीवन राम गोदारा का एकछत्र राज

राज ऐसा की व्यपारी अपना व्यवसाय न कर पाए टेक्सी वाले अपनी टेक्सिया न चला पाए आमजन की बालिकाएं स्कूल न जा पाए अगर जीवन गोदारा मना कर दे तो

स्थानीय लोग बताते थे कि चौराहे पर जीवन के गुर्गे खुले आम स्कूल कॉलेज आती जाती लड़कियों को छेड़ते लेकिन मजाल जो कोई उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाए

ऐसे में बुरडक के खिलाफ बदले की भावना लिए बैठे आनंदपाल पर डीडवाना के व्यापारियों की नजर पड़ी उन्होंने आनंदपाल को आपबीती सुनाई

फिर क्या था????

एक दिन भरी दोपहर 3 टाटा सूमो गाड़िया डीडवाना चौराहे पर आई धड़ाधड़ गोलियों की आवाज आई और कुछ ही पलों में जीवन राम और उसके 3 साथ चौराहे पर ही खत्म

जिस त्रासदी को लोग बरसो से झेल रहे थें आनंदपाल ने क्षण भर में खात्मा कर दिया था

नागौर जिले में बाकी 35 कॉम के लिये उसकी छवि रोबिन हुड जैसी बन गयी थी

कहते है आनंदपाल इतना शार्प शूटर था कि उसकी 1 बुलेट सामने वाले 1 को लेकर ही जमीन में घुसती थी जब तक जिंदा रहा अपने पास ऑटोमेटिक हथियार रखे

स्थानीय समर्थन इतना जितना कभी कर्नाटक के जंगलों में वीरप्पन को मिला करता था नागौर सिक्कर इलाके में अगर आनंदपाल आधी रात किसी के घर पनाह मांग ले तो अगला बड़े मन्नवल से आनंदपाल को कुछ दिन रुकने की इजाजत दे देता था

आनंदपाल की सबसे बड़ी खासियत ये की नशा किसी चीज  का नही सुबह शाम दूध से शुरुवात साथ हमेशा अपनी गाड़ी में 4/5 किलो  बादाम काजू साथ मे ही रखता था
इसके अलावा उसने न कभी शराब पी न मांस खाया न व्यभिचार की आदत थी सो पुलिस के लिये ये ही सबसे बड़ी दिक्कत थी कि गुंडो के जहा ठिकाने होते थे वहां आनंदपाल के होने की कल्पना भी नही कर सकती थी

ये वही आनंदपाल था जो 2015 में   2 जिले की पुलिस को चकमा दे कर फरार हो गया था ये वो ही आनंदपाल था जो 5 राज्यो की पुलिस के लिये अनबुझी पहेली बना हुआ था आखिर कार अपने भाई के कारण जिंदगी गवा गया

बेशक आनंदपाल गुंडा 5 लाख का इनामी बदमाश था लेकिन 1 गरीव का नाम बताइये जिसको लूट आनंदपाल ने गुंडागर्दी की हो

किसी 1 महिला का नाम बताइये जिसकी इज्जत पर आनन्दपाल ने हाथ डाला हो

नही बता सकते न????

फिर आप उस आनंदपाल का विरोध क्यों करते है जिसने लड़कियों की अस्मत लूटने वाले गरीब लोगों से पैसे एठने वाले गरीब रिक्शा वालो से मारकूट करने वाले हरजीराम बुरडक के गुर्गों को ठिकाने लगाया

जिसने नागौर वासियो को एहसास दिलाया कि आप चेन की नींद लीजिये क्योंकि में अभी बाहर हूँ

खेर सरकार से न ज्यादा दोस्ती अच्छी न दुश्मनी

इसी सरकारी तंत्र  का शिकार कभी मुम्बई मान्या सुर्वे हुआ था जिसे सीने में दाऊद से बदला लेने की आग थी

इसी सरकारी तंत्र का शिकार कल रात आनंदपाल हो गया

बहुत मेहनत से ये पोस्ट लिखी है शेयर जरूर करे (Y)

Posted By :-- Aapno Rajasthan <3